नंदी हिल्स – प्राकृतिक सौंदर्य, इतिहास और रोमांच का अनूठा संगम

दोस्तो, बैंगलोर के बारे में कौन नहीं जानता? भारत में आई टी उद्योग का केंद्र बैंगलोर एक बहुत खूबसूरत शहर भी है। और यहां आने वाले लोग इसकी सुंदरता के कायल हो जाते हैं। लेकिन इस शहर के आसपास भी कुछ ऐसी जगहें हैं जो इससे भी ज़्यादा सुन्दर हैं और अपने आप में एक आकर्षण का केंद्र हैं। ऐसी ही एक यह है नंदी हिल्स। बैंगलोर से सिर्फ 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नंदी हिल्स एक छोटा पर बहुत ही सुंदर हिल स्टेशन है।

नंदी हिल्स की सुंदरता

कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में स्थित नंदी हिल्स को नन्दीबेट्टा या नंदीदुर्ग भी कहा जाता है। समुद्र तट से 5000 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित इस जगह का अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। ऐसा कहा जाता है कि अर्कावती नदी यहीं से शुरू हुई थी।

नंदी हिल्स एक फोटो खींचने लायक जगह है जहां सुंदर दृश्यों की भरमार है। अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है तो यह यह आपके लिए है। और अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो भी यह जगह आपको बहुत भाएगी। यहां कई प्रकार के फूल और पौधे आपको मिलेंगे और उनके साथ जंगली जानवरों की कई प्रजातियां भी आप देख सकते हैं। कई प्रकार के दुर्लभ फूल और जड़ी बूटियां यहां आपको मिलेंगी। पहाड़ की ठंडी हवा और शांत और सुरम्य वातावरण आपके तन और मन दोनों को तरो ताज़ा कर देगा।

बैंगलोर में नंदी हिल्स का नाम कैसे पड़ा इसके बारे में भी कई बातें प्रचिलित हैं। पहले नंदी हिल्स का नाम आनन्दा गिरी था जिसका मतलब होता है ख़ुशी के पहाड़ लेकिन कहा जाता है इसका नाम योगा नन्दीश्वरा के नाम पर रखा गया। एक दूसरी कहानी के अनुसार इसका नाम नंदी हिल्स इसलिए पड़ा क्योंकि इसका आकार एक सोए हुए बैल(नंदी) जैसा है। एक और कहानी यह कहती है कि इसका नाम नंदीदुर्ग के नाम पर पड़ा था। नंदीदुर्ग मैसूर के तत्कालीन शासक टीपू सुल्तान द्वारा बनाया गया क़िला था।

नंदी हिल्स में देखने वाली जगहें और करने वाली गतिविधियां

टीपू की चट्टान नंदी हिल्स

प्रकृति प्रेमियों के लिए यह अवश्य देखने वाली जगह है। पहाड़ों के ऊपर स्थित यह एक चट्टान है जो ज़मीन से ६०० मीटर ऊपर है। यहां से आपको नंदी हिल्स के आसपास का पूरा नज़ारा और इसकी सुंदरता बिलकुल साफ़ नज़र आएगी। यहां से आपको शहर का विहंगम दृश्य नज़र आएगा। इस जगह से आपको आसपास के बहुत सुंदर दृश्य नज़र आएँगे। टीपू की चट्टान का इतिहास हालांकि बहुत अच्छा नहीं है। कहा जाता है कि टीपू सुल्तान अपने क़ैदियों को यहां से नीचे फिंकवा देता था। लेकिन यहां खड़े होकर जो प्राकृतिक सुंदरता आप देखेंगे उसका कोई जोड़ नहीं है।

टीपू सुल्तान का किला

टीपू-सुल्तान-का-किलानंदी हिल्स पर इस क़िले को बनाने की शुरुआत हैदर अली ने की थी लेकिन इसे पूरा टीपू सुल्तान ने किया। यह क़िला गर्व नंदी हिल्स के ऊपर खड़ा है। इस क़िले में उस ज़माने की अद्भुत कला और वास्तुकला पूरे वैभव के साथ दिखाई पड़ती है। इसी वजह से इस क़िले को तश्क-ए-जन्नत यानी स्वर्ग की ईर्ष्या भी कहा जाता है। टीपू सुलतान का यह क़िला ज़्यादातर लकड़ी का ही बना हुआ है पर इसकी दीवारों और छतों पर बने चित्र बहुत ही आकर्षक हैं और बरबस ही आपका ध्यान खींच लेते हैं।

इस क़िले में पांच मेहराब हैं और कई मीनार हैं। और यह सभी बहुत दर्शनीय हैं। टीपू सुल्तान के क़िले के आसपास ट्रैकिंग के कई मार्ग हैं। ये सभी मार्ग प्राकृतिक सुंदरता से भरे हुए हैं और इन पर ट्रैकिंग करना बहुत ही आनंददायक है। तो यदि आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं तो यह टीपू सुल्तान का क़िला देखने की आपके लिए एक और वजह है।

अमृत सरोवर नंदी हिल्स

अमृत-सरोवर-नंदी-हिल्सयह सदाबाहर झरनों द्वारा बनाई गई एक सुंदर झीलनुमा जगह है जिसे “अमृत की झील” भी कहते हैं। यह इस क्षेत्र में जल का मुख्य स्त्रोत है। यदि आप रात अमृत सरोवर में जाएंगे तो इसकी छटा देखते ही बनती है। इसके शांत और एकदम साफ़ पानी में चाँद का प्रतिबिंब बहुत ही आकर्षक दिखता है। सरोवर के नज़दीक ही एक चबूतरा है जिसके बारे में कहा जाता है कि टीपू सुल्तान यहाँ प्रार्थना करने आया करता था। इस सरोवर के सुंदर वातावरण में आप शान्ति से कुछ समय बिता सकते हैं।

भोग नन्दीश्वर मंदिर

नंदी हिल्स के तल पर यह ९वीं शताब्दी का सुंदर मंदिर स्थित है। इसकी वास्तुकला और डिज़ाइन दोनों ही अद्भुत और चौंका देने वाले हैं। यह कर्नाटक के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और फिलहाल आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (एएसआई) के संरक्षण में है। भोग नन्दीश्वर मंदिर की भव्यता वास्तव में मंत्रमुग्ध कर देने वाली है। यह उन कुछ मंदिरों में से एक है जिन्हें समय के साथ बहुत संभाल कर रखा गया है। मंदिर में की आई महीन नक़्क़ाशी और इसका डिज़ाइन आपको हैरान कर देगा। आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे की उस ज़माने के कलाकार और शिल्पकार बिना आधुनिक औज़ारों के कैसे इतना बारीक काम कर पाते थे और ऐसा ढांचा कैसे खड़ा कर लेते थे।

भोग नन्दीश्वर मंदिर के अंदर आपको काले पत्थर के बारीक नक़्क़ाशी वाले स्तंभ मिलेंगे। इन स्तंभों पर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के बारे में कहानियां लिखी हुई हैं। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसे राष्ट्रीय महत्त्व का स्मारक घोषित किया गया है। मंदिर में एक बार घूमने से आपको अंदर तक शान्ति का अनुभव होगा। सभी आयु के लोग इस मंदिर में आते हैं और इसकी भव्यता और वास्तुकला को निहारते हैं।

योगा नन्दीश्वरा मंदिर नंदी हिल्स

नंदी हिल्स के ऊपर भोगा नन्दीश्वरा मंदिर का जुड़वां मंदिर है जिसे योगा नन्दीश्वरा मंदिर मंदिर कहते हैं। कर्नाटक में शुरू से जुड़वां मंदिर बनाने की परंपरा रही है। एक मंदिर पहाड़ की तलहटी पर और दूसरा सबसे ऊपर बनाया जाता है। यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है। जैसे ही आप मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचेंगे, वहां पर बैल नंदी की एक विशाल मूर्ति मिलेगी, जिससे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि आपको क्या मिलने वाला है। योगा नन्दीश्वरा मंदिर भी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है। योगा नन्दीश्वरा मंदिर की विशेषता है इसके एक पत्थर से बने हुए स्तंभ। इन स्तंभों पर विभिन्न देवी देवताओं के चित्र गढ़े गए हैं। इस मंदिर के अंदर तीन मंदिर हैं जो अरुणाचलेश्वर, उमा महेश्वर और योगा नंदीश्वर को समर्पित हैं जो भगवान शिव की युवावस्था, विवाह और परित्याग की स्थितियों को दर्शाते हैं।

साइकिलिंग

नंदी हिल्स और इसके आसपास साइकिलिंग करने की बहुत अच्छी जगहें हैं। सुहावने मौसम और प्रकृति के सुंदर वातावरण में साइकिलिंग करने का अपना ही अलग मज़ा है। इससे आपके शरीर का व्यायाम तो होगा ही साथ ही आप उन सुन्दर जगहों का आनंद भी उठा सकते हैं जो वैसे शायद आप ना देख पाएं। नंदी हिल्स का सुंदर परिदृश्य और घुमावदार रास्ते आपको साइकिलिंग का एक यादगार अनुभव देंगे।

पैराग्लाइडिंग

कर्नाटक में नंदी हिल्स उन चुनी हुई जगहों में से एक है जहां पैराग्लाइडिंग की सुविधा उपलब्ध है। आप सुरम्य वादियों में इस खेल का भरपूर आनंद उठा सकते हैं। सुंदर दृश्यों और शांत वातावरण में उड़ते हुए आपको एक अलग ही एहसास होगा। आप पक्षी की तरह उड़ते हुए आसपास की खूबसूरत जगहों का नज़ारा ले सकते हैं।

नंदी हिल्स कैसे पहुंचें

हवाई मार्ग – सबसे नज़दीक हवाई अड्डा हिंदुस्तान हवाई अड्डा है जो 42 किलोमीटर दूर है। दूसरा हवाई अड्डा है मैसूर जो 165 किलोमीटर दूर स्थित है। आप इन दोनों जगहों से सड़क मार्ग से नंदी हिल्स पहुँच सकते हैं।

रेल मार्ग – नंदी हिल्स के लिए सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है ओड्डाराहल्ली जो 16 किलोमीटर दूर है। चिक्कबल्लापुर स्टेशन यहां से 19 किलोमीटर दूर है। बैंगलोर से आने वाली सभी गाड़ियां यहां रूकती हैं।

सड़क मार्ग – बैंगलोर से सिर्फ 60 किलोमीटर दूर होने के कारण आप वहां से टैक्सी करके भी नंदी हिल्स पहुँच सकते हैं। बैंगलोर से नंदी हिल्स के लिए राज्य सरकार की बसें भी उपलब्ध हैं। बैंगलोर से नंदी हिल्स की सड़कें अच्छी हैं और रास्ता बहुत आनंददायक है।

नंदी हिल्स में कहाँ रुकें – नंदी हिल्स में रुकने के लिए कोई विशेष इंतज़ाम नहीं है केवल राज्य सरकार का एक गेस्ट हाउस है। हालांकि नंदी हिल्स के आसपास बहुत से होटल हैं जहां आप रुक सकते हैं।

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