गणपतिपुले – भारत के सबसे सुंदर छुपे हुए समुद्र तट

गणपतिपुले – भारत के हर कोने में इतनी अद्भुत जगहें हैं कि हरेक के बारे में बताना आसान नहीं है। कुछ जगहें ऐसी हैं जिनके बारे में हर कोई जानता है और जो खुद में इतनी प्रसिद्ध हैं कि उनके बारे में बताने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती, उदाहरण के लिए आगरा, जयपुर या ऊटी, दार्जीलिंग। यह ऐसी जगहें हैं जिनके बारे में देश तो क्या विदेश में भी लोग जानते हैं। लेकिन अपने ही देश में कुछ ऐसे आकर्षक स्थान है बारे में हम में से बहुत लोग नहीं जानते या कभी वहां गए नहीं। ये वे छुपे हुए नगीने हैं जिनके बारे में आप अगर जान लें और एक बार इन्हें देख लें तो आप खुद हैरान होंगे कि इतनी खूबसूरत जगह आपसे छुपी कैसे रही?

ऐसी ही एक जगह है गणपतिपुले। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित यह छोटा सा शहर कोंकण तट के साथ बसा हुआ है। चाहे आप एक सामान्य यात्री हैं या रोमांच के तलाश में हैं, चाहे आपको समुद्र तट पसंद हैं या आ किसी शांत जगह पर जाना चाहते हैं और अगर इन सब के अलावा आप तीर्थ यात्रा भी करना चाहते हैं तो गणपतिपुले आपके लिए है। यानी कि इस छोटी सी जगह और इसके आसपास हर किसी केलिए कुछ न कुछ है जो उसे यहाँ आकर्षित कर सकता है।

गणपतिपुले के आसपास अन्य आकर्षण के केंद्र

गणपतिपुले और इसके आसपास के अन्य समुद्र तट भारत के सबसे साफ़ और शांत समुद्र तटों में से हैं। यहां आपको ना तो ज़्यादा भीड़ भाड़ मिलेगी और ना ही कोई गंदगी। यहां का पानी बिलकुल साफ़ है और वातावरण बिलकुल स्वच्छ।

कोंकण क्षेत्र में केवल दो सफ़ेद रेत वाले समुद्र तट हैं। गणपतिपुले इनमें से एक है और सबसे साफ़ है। छह किलोमीटर लंबे इस तट का साफ़ नीला पानी अपने आप में एक आकर्षण का केंद्र है। यह तट मैनग्रोव, नारियल और ताड़ के पेड़ों से घिरा हुआ है और यहाँ बहुत सुन्दर फूल भी मिलते हैं। गणपतिपुले तट पर आपको रुकने के लिए कई झोंपड़ियाँ मिलेंगी। इसके अलावा आप यहां घुड़सवारी और ऊँट की सवारी का आनंद भी ले सकते हैं। साथ ही यहां पर पानी के कई खेल भी उपलब्ध हैं।

स्वयंभू गणेश मंदिर

यह गणपतिपुले का सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र है। यह ना सिर्फ एक मंदिर है बल्कि इसे तीर्थ भी माना जाता है और हर साल यहां अनगिनत लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। ठीक समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर अपनी लगभग 400 साल पुरानी गणेश प्रतिमा के लिए जाना जाता है। कहा जाता है एक बार एक स्थानीय स्त्री ने श्री गणेश को किसी बात पर ताना दिया जिससे नाराज़ होकर श्री गणेश अपने मूल निवास गुले को छोड़ कर कुछ दूर स्थित पुले में आ गए। यह गणेश प्रतिमा सफ़ेद रेत से बनी है। इस प्रतिमा की ख़ास बात यह है कि अन्य गणेश प्रतिमाओं का चेहरा पूर्व की ओर होता है लेकिन इस प्रतिमा का चेहरा पश्चिम की ओर है और इसीलिए श्री गणेश को यहाँ पश्चिमी द्वारपालक भी कहा जाता है।

स्वयंभू गणेश मंदिर एक पहाड़ की तलहटी में बना है एयर तीर्थ यात्री इसकी परिक्रमा करना पवित्र मानते हैं। इसे स्वयंभू गणेश मंदिर इसलिए कहा जाता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि श्री गणेश की यह प्रतिमा खुद ही धरती से प्रकट हुई थी। श्री गणेश की तांबे से बनी एक और प्रतिमा मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित है। मंदिर के बाहर की तरफ मूषक (श्री गणेश का वाहन) की तांबे की बनी मूर्ति लगी हुई है। समुद्र तट पर बना यह मंदिर तट की शोभा भी निखारता है।

जयगढ़ फोर्ट

गणपतिपुले से 20 किलोमीटर दूर स्थित जयगढ़ फोर्ट एक सुरक्षित स्मारक है और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (एएसआई) की देख रेख में रहता है। शास्त्री नदी जहां अरब सागर से मिलती है उस जगह को जयगढ़ की खाड़ी कहते हैं। इस खाड़ी की सुरक्षा के लिए दो क़िले बनाए गए थे, जयगढ़ और विजयगढ़। जयगढ़ फोर्ट का निर्माण 14वीं सदी में शुरू हुआ था लेकिन यह 17वीं सदी में बीजापुर के सुलतान द्वारा पूरा किया गया। शिवाजी काल में उनके प्रमुख सेनापति कान्होजी अँगरे ने इस क़िले पर कब्ज़ा कर लिया और कुछ समय तक यह शिवाजी के पास रहा। बाद में उन्होंने इसे पेशवाओं को सौंप दिया। वर्ष 1818 में अंग्रेज़ों ने इस क़िले पर क़ब्ज़ा कर लिया।

जयगढ़ फोर्ट की बाहरी दीवारें और प्राचीर अभी भी बिलकुल सही हैं। यह क़िला एक पहाड़ी पर स्थित है और यहां ऊपर से समुद्र का खूबसूरत नज़ारा साफ़ देखा जा सकता है। इसके अलावा यहाँ से कोंकण के ग्रामीण जीवन की बेहद अच्छी झलक यहां से मिलती है।इस क़िले के अंदर गणपति का एक मंदिर और तीन कुँए बने हुए हैं। क़िले के बीचों बीच कान्होजी अँगरे का महल स्थित है। जयगढ़ फोर्ट दखिन की ओर से खाइयों और बुर्जों से घिरा हुआ है। क़िले के अंदर ही एक सरकारी रेस्ट हाउस भी स्थित है। जयगढ़ फोर्ट पहुँचने के लिए गणपतिपुले से स्थानीय परिवहन आसानी से उपलब्ध है।

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लाइट हाउस – गणपतिपुले

जयगढ़ फोर्ट से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लाइटहाउस। इसकी ख़ास बात यह है कि यह पूरा का पूरा कास्ट आयरन से बनाया गया है। साल 1932 में बना यह लाइटहाउस अभी भी काम कर रहा है। यहां से आपको न सिर्फ समुद्र तट बल्कि पूरे समुद्र और आसपास का दिलकश नज़ारा दिखाई पड़ेगा। बीच के साथ साथ एक अच्छी सड़क बनी हुई है जिस पर आप अपना वाहन ठीक लाइटहाउस के दरवाज़े तक ले जा सकते हैं।

प्राचीन कोंकण म्यूजियम

गणपतिपुले से सिर्फ एक किलोमीटर दूर स्थित यह एक खुली हवा में स्थित संग्रहालय है। यदि आप कोंकण के स्थानीय जीवन के बारे में जानता चाहते हैं गतो इस म्यूजियम में जाएं। इस म्यूजियम में आपको कोंकण की जीवन शैली से संबंधित सब कुछ दिखेगा। इस म्यूजियम की स्थापना साल 2004 में वैभव सरदेसाई ने की थी। यहाँ आपको कोंकण क्षेत्र के अद्भुत समुद्री क़िलों के मॉडल मिलेंगे। साथ ही यह म्यूजियम स्थानीय लोगों के विभिन्न व्यवसायों को भी दर्शाता है। इसके अलावा स्थानीय देवी देवताओं की मूर्तियां और पुरानी लें दें प्रणाली के प्रतीक भी यहां आपको मिलेंगे। शिवाजी महाराज की प्रतिमा भी यहाँ राखी गई है और उनके ऐतिहासिक पलों को दर्शाया गया है।

प्राचीन कोंकण म्यूजियम की एक ख़ास बात है यहां का नक्षत्र बाग़। इसमें हर राशि से संबंधित एक वृक्ष आपको मिलेगा। और इस बाग़ की हरियाली की वजह से यहां आपको बहुत से स्थानीय और अन्य पक्षी भी दिखेंगे।

म्यूजियम के अंदर एक प्रदर्शनी कक्ष है जिसमें सावंतवाड़ी के लकड़ी के हस्तशिल्प मिलते हैं। यहां से आप स्मृति चिन्ह खरीद सकते हैं।

आरे वारे बीच – गणपतिपुले

गणपतिपुले से 8 किलोमीटर दूर यह एक और बेहत सुंदर बीच है। दूसरे बीचों की तुलना में इस बीच के बारे में अभी बहुत कमलोगों को पता है इसलिए इसकी सुंदरता और स्वछता अभी बरकरार है। साफ़ पानी वाला और हरियाली से घिरा यह बीच आपको मंत्रमुग्ध कर देगा। यहां का शांत वातावरण आपको यहीं का हो जाने को प्रेरित करेगा। यहां इंसानी गतिविधि बहुत कम है इसलिए आप जितना समय यहां शान्ति से बिताना चाहें बिता सकते हैं। लेकिन आरे वारे बीच में आपको एक चीज़ का ध्यान रखना पड़ेगा। अगर आप यहाँ तैरना चाहते हैं तो ज़्यादा आगे ना जाएं क्योंकि किसी समस्या की स्थिति में मदद मिलने में मुश्किल हो सकती है।

आरे वारे बीच

यह एक और साफ़ और सुंदर बीच है। यह बीच गणपतिपुले से 2.5 किलोमीटर दूर मालगुंड गाँव के नज़दीक है। इस बीच की ख़ास बात है कि यह पानी के खेलों का गढ़ माना जाता है। यहां आप पैराग्लाइडिंग, मोटर बोट, पड़ले बोट और पानी के स्कूटर आदि की सवारी का आनंद ले सकते हैं। साथ ही यहां तैराकी की भी सुविधा उपलब्ध है।

गणपतिपुले कैसे पहुंचें

हवाई मार्ग गणपतिपुले नज़दीकी बड़े हवाई अड्डे हैं मुंबई और पुणे जो 352 और 335 किलोमीटर दूर हैं। यहां से आप टैक्सी करके गणपतिपुले पहुँच सकते हैं।

रेल मार्ग – सबसे नज़दीक रेलवे स्टेशन 25 किलोमीटर दूर रत्नागिरी स्टेशन है। यहां से गणपतिपुले के लिए टैक्सियां और स्थानीय बसें भी उपलब्ध हैं।

सड़क मार्ग – गणपतिपुले सड़क मार्ग से सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। आप टैक्सी से या अपने वाहन से सड़क मार्ग से आसानी से यहां पहुँच सकते हैं।

गणपतिपुले में कहाँ रुकें

यहां रुकने के लिए सबसे अच्छी जगह है महाराष्ट्र सरकार का एमआईडीसी बीच रिसोर्ट जो बीच पर ही स्थित है। यहां की कीमतें भी मुनासिब हैं और सुविधाएं भी अच्छी हैं। इसके अलावा यहां कुछ अन्य अच्छे होटल और रिसोर्ट भी यहां हैं जहां आप रुक सकते हैं।

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