भारत में 7 प्रकार की हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी (Health Insurance Policies India)

1. इंडिविजुअल हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी

यदि आपके एक इंडिविजुअल हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी रखते है, तो आप केवल अकेले ही पूरी इंश्योरेंस राशि का दावा करने के लिए पात्र हों सकते है, और इसके अलावा, प्लान में शामिल सभी बेनिफिट किसी को ट्रांसफर नहीं किए जा सकते है।

इंडिविजुअल हेल्थ योजनाओं के सबसे बड़े लाभ हैं –

  • परिवार के बजाय प्रत्येक व्यक्ति के लिए उच्च सुरक्षा प्रदान करता है।
  • पॉलिसी को बिना किसी उम्र के प्रतिबंध के नवीनीकृत किया जा सकता है।
  • हेल्थ जोखिम वाले लोगों के लिए उपयुक्त है।
  • परिवार के अन्य सदस्यों के लिए कोई जोखिम नही, भले ही कवर एक वर्ष में समाप्त हो जाए।

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2. फैमिली फ्लोटर हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी

फैमिली फ्लोटर हेल्थ पॉलिसीयां पूरी फैमिली के लिए छतरी रूपक हेल्थ कवर हैं। पूरी फैमिली के लिए एक इक्कठ्ठा हेल्थ कवर प्लान प्राप्त करने के लिए सिंगल प्रीमियम का भुगतान किया जाना होता है और हेल्थ कवरेज की राशि का उपयोग फैमिली के किसी भी सदस्य के अस्पताल में भर्ती खर्च के लिए किया जा सकता है।

पॉलिसी के लाभ निम्न है –

  • आप कम लागत पर अपने पूरी फैमिली का हेल्थ इन्शुरन्स द्वारा कवर करवा सकते हैं।
  • आप 2 वयस्कों के साथ प्रत्येक पॉलिसी के लिए 4 बच्चों को कवर कर सकते हैं।

फैमिली फ्लोटर हेल्थ पॉलिसी का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि

  • परिवार के एक सदस्य के अस्पताल में भर्ती होने के कारण पूरी कवर राशि के समाप्त होने की संभावना है।

यदि आपके परिवार के सदस्य ज़्यादा बीमार रहते है, तो इंडिविजुअल योजनाओं का विकल्प चुनें।

3. सीनियर सिटीजन हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी

वृद्धावस्था में हेल्थ इन्शुरन्स खरीदना कठिन या असम्भव हो जाता है। मेरा सुझाव है कि आपको अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी उनके वृद्ध होने से पहले खरीद लेनी चाहिए।

सीनियर सिटीजन पॉलिसीयां इंडिविजुअल हेल्थ पॉलिसीयों के समान हैं, लेकिन कड़े मेडिकल चेकअप, उच्च प्रीमियम, पहले से मौजूद बीमारियों के लिए ज़्यादा प्रतीक्षा अवधि और अधिक बहिष्करण खंडों के साथ आती हैं।

इन पॉलिसीयों को आमतौर पर उन लोगों द्वारा खरीदा जाता है जो 60 वर्ष की आयु पार कर चुके होते हैं, और जिन्होने अभी तक हेल्थ इन्शुरन्स नही लिया है।

4. टॉप-अप और सुपर टॉप-अप इन्शुरन्स

टॉप-अप और सुपर टॉप-अप पॉलिसीयां हेल्थ पॉलिसीयों का ही एक रूप हैं जो ‘डिडक्टिबल’ के साथ आती हैं। अस्पताल में किए जाने वाले खर्च के रूप में डिडक्टिबल राशि के रूप में निश्चित राशि के बाद ये पॉलिसीयां लागू होती हैं।

उदाहरण के लिए, मान लो कि आपने 5 लाख रुपये के डिडक्टिबल के साथ 20 लाख रुपये की टॉप-अप / सुपर टॉप-अप पॉलिसी खरीदी है। यदि आप अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो आप 5 लाख रु के उपर के अपने सभी अस्पताल के खर्चों के लिए टॉप-अप / सुपर टॉप-अप पॉलिसी से दावा करने के पात्र हैं।

इन पॉलिसीयों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको कम प्रीमियम पर बड़ा कवर मिल सकता है। भले ही एक डिडक्टिबल की शर्त लागू हो, आप एक बेसिक हेल्थ पॉलिसी ले सकते हैं, जिसकी बीमित राशि डिडक्टिबल के बराबर हो।

5. कैंसर या क्रिटिकल इलनेस

सबसे बड़ा लाभ यह है कि ये पॉलिसीयां हृदय रोग या कैंसर जैसी बीमारियों को कवर करती हैं, जिन्हें आमतौर पर कई इंश्योरेंसकर्ता टालते हैं। इस तरह की पॉलिसीयों के लिए प्रीमियम अधिक होता है क्योंकि इसमें इंश्योरेंसकर्ता के लिए जोखिम अधिक होता है।

इन पॉलिसीयों को उन लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जिन्हे पहले से ही कुछ बीमारियों हैं या कुछ बीमारियों के होने का खतरा अधिक है।

6. मैटरनिटी हेल्थ इन्शुरन्स

मेडिकल इन्शुरन्स कंपनियां आज अतिरिक्त लागतों को कवर करती हैं, जिनमें प्रसव पूर्व देखभाल और प्रसव के बाद की देखभाल, डिलीवरी (सामान्य या सिजेरियन) शामिल हैं, और कभी-कभी मैटरनिटी प्लान में नवजात शिशुओं का टीकाकरण भी शामिल है।

यह इंश्योरेंस नवजात शिशु को इस पॉलिसी की वैधता तक कवर करता है। यह अपनी पसंद के निकटतम नेटवर्क अस्पताल में परिवहन शुल्क को भी कवर करता है।

7. यूनिट लिंक्ड हेल्थ इन्शुरन्स

यूनिट- लिंक्ड हेल्थ प्लान (ULHP) हाल ही में पेश किया गया है, जो हेल्थ इन्शुरन्स और निवेश का एक अनूठा संयोजन प्रदान करता है। हेल्थ केयर देने के अलावा, ULHPs एक ऐसे कोष के निर्माण में भी योगदान देता है, जिसका उपयोग उन खर्चों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है, जो हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसियों द्वारा कवर नहीं किए जाते हैं।

भारतीय बाजार में उपलब्ध ULHPs में आईसीआईसीआई प्रू हेल्थ सेवर, एलआईसी हेल्थ प्रोटेक्शन प्लस, बिड़ला सनलाइफ ईज़ी हेल्थ और इंडियाफर्स्ट के मनी बैक हेल्थ इन्शुरन्स प्लान कुछ बड़े नाम हैं। इस प्लान के लिए चयन करके, एक निश्चित राशि बचाई जा सकती है, जिसे बाद में किसी भी पहले से मौजूद बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जो प्रतीक्षा अवधि के दौरान सामान्य हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी द्वारा कवर नहीं की जाती हैं।

नियोक्ता से मिले हेल्थ इन्शुरन्स पर निर्भर न रहें:

नियोक्ता द्वारा प्रदान किए गए ग्रुप हेल्थ कवरेज के कारण अक्सर लोग हेल्थ कवर लेना पसंद नही करते हैं, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका नियोक्ता आपको कितना हेल्थ कवर प्रदान करता है, क्योंकि इसकी अपनी बहुत सारी कमियां हैं।

आइए समझते हैं कि आपका अपना हेल्थ कवरेज क्यों महत्वपूर्ण है –

  • नियोक्ता द्वारा प्रदान किया गया इंश्योरेंस लाभ आपके द्वारा नौकरी छोड़ने या बदलने के समय समाप्त हो जाता है।
  • आप नियोक्ता के हेल्थ इन्शुरन्स के लाभों को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं।
  • जीवन में जल्दी हेल्थ कवर होने से हमेशा मदद मिलती है, ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रतीक्षा अवधि क्लॉज लागू नहीं होगी और बाद में आपके भविष्य की कोई भी बीमारी (यदि होती है) कवर हो जाएगी।
  • नियोक्ता द्वारा प्रदान किया गया इंश्योरेंस नियम किसी भी समय बदल सकता है।
  • नियोक्ता द्वारा प्राप्त हेल्थ कवरेज से आप केवल एक अस्पताल में भर्ती हो सकते है। इसलिए आपके पास एक बैकअप पॉलिसी होनी चाहिए।
  • क्या आप रिटायरमेंट के बाद का महंगा हेल्थ कवर खरीदेंगे?

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