मुजफ्फरपुर19 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

कटरा में बसघट्टा से यजुअार जाने वाली सड़क पर चढ़ा बाढ़ का पानी।

  • जिले के 13 प्रखंड की 111 पंचायत पूर्ण तो 95 आंशिक रूप से प्रभावित, अपने बचाव के लिए रात भर जग कर बांध की सुरक्षा कर रहे स्थानीय लोग

जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। अभी स्थिति यह है कि लोग दूसरी ओर का बांध काटकर भी अपने को सुरक्षित करना चाहते हैं। इसको देखते हुए बांध के आसपास के ग्रामीण रतजगा कर अपने क्षेत्र के बांध की सुरक्षा में लगे हुए हैं। जिले के 1181 गांव की 12.10 लाख आबादी बाढ़ प्रभावित हो चुकी हैं। अभी 13 प्रखंडों की 111 पंचायतें जहां बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हो चुकी हैं, वहीं 95 पंचायताें में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। जिले के मोतीपुर प्रखंड के मठिया मोड़संडी में काटे गए तटबंध की मरम्मत की गई। इसके साथ ही अहियापुर में टूटे रिंग बांध के सामने के बांध पर भी पानी का दबाव बना हुआ है। कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा उसे काटने का भी प्रयास करने की स्थानीय लोगों ने जानकारी दी है।

शुक्रवार को उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार, अब तक 206 पंचायतों के 2043 वार्ड बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। बाढ़ प्रभावितों के लिए 221 स्थानों पर सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में 28 सरकारी तथा 215 निजी नावाें का परिचालन जारी है। बाढ़ से विस्थापित हुए प्रभावितों के बीच 40303 पॉलिथीन सीट का वितरण किया गया है। साथ ही प्रभावित परिवारों में 19969 पैकेट सूखा राशन वितरित किया गया है। जल संसाधन विभाग के सचिव संजीव हंस ने जिला प्रशासन को बूढ़ी गंडक तटबंध की मरम्मत तथा निरीक्षण में बाधा डालने की सूचना दी है।

उन्होंने कहा कि बूढ़ी गंडक नदी के बायां तटबंध के 24 से 30 किलोमीटर के बीच पियर में व दायां तटबंध के 20 से 24 किलोमीटर के बीच सकरा प्रखंड में असामाजिक तत्वों द्वारा बाधा उत्पन्न किया जा रहा है। बूढ़ी गंडक का जलस्तर वर्ष 1987 के बाद सबसे अधिक होने के कारण तटबंध के इस क्षेत्र पर अधिक दबाव हाे गया है। उन्होंने निरीक्षण के दौरान दो कनीय अभियंताओं तथा ठेकेदार को असामाजिक तत्वों द्वारा बाधा डालने की सूचना दी है।

बूढ़ी गंडक तटबंध की मरम्मत और निरीक्षण में असामाजिक तत्व डाल रहे बाधा

अहियापुर इलाके की शेखपुर पंचायत में जुगाड़ की नाव, वह भी ओवरलोड।

गायघाट में राहत राशि की मांग को लेकर एनएच 57 जाम करते बाढ़ पीड़ित।

बकुची चौक से लेकर पतारी, नवादा से लेकर गंगेया सड़क पर 1 से लेकर 3 फीट तक पानी

बागमती नदी की मुख्यधारा बकुची व उपधारा बसघट्टा के जलस्तर में फिर से वृद्धि प्रारंभ हो गई है। बसघट्टा मंें ध्वस्त पुल से लेकर बकुची चौक व काॅलेज के समीप बांध तक व बकुची-बेनीबाद सड़क में बकुची चौक से लेकर पतारी, नवादा से लेकर गंगेया तक 1 से लेकर 3 फीट तक पानी का बहाव जारी है। इधर, बसघट्टा परियोजना बांध पर विनोद दास की दुकान से समीप से लेकर स्कूल के रास्ते खंगुरा सियावर सीमा तक व डुमरी-पहसौल पथ पर कुल मिलाकर प्रखंड के करीब 10 किमी सड़काें पर बाढ़ के पानी का बहाव एक लेकर तीन फीट तक जारी है।

जिसके कारण प्रखंड में आवागमन की समस्या गंभीर हो गई है। पीपा पुल बकुची व गंगेया के दोनों छोर के साथ ही बकुची पावर सबस्टेशन पर पानी का दबाव बना हुआ है। इधर, परियोजना बांध के भीतर बसे बकुची, पतारी, बसघट्टा, मोहनुपर, अंदामा, नवादा में विस्थापितों के बीच आधा-अधूरा पाॅलिथीन वितरण किए जाने आक्रोश है। सीओ सुबोध कुमार ने बताया कि मुखिया के माध्यम से पाॅलिथीन सीट व सामुदायिक किचन से भाेजन का वितरण किया जा रहा है।

बाढ़ पीड़िताें की सुध लेने न ताे नेता आए और न ही अधिकारी

नरकटिया व सहिलारामपुर पंचायत के 200 से भी अधिक परिवार बाढ़ के कारण विस्थापन होकर छपरा-बलुआहा ढाला रोड किनारे पानी डालकर शरण लिए हुए हैं। इनके समक्ष भोजन व पीने के पानी की समस्या है। पीड़ित सविता देवी ने बताया कि अचानक बुधवार की रात पानी बढ़ने लगा अाैर घर में घुस गया। गुरुवार की सुबह घर छोड़कर इस रास्ते पर पाॅलिथीन टांग कर रहने को मजबूर हो गए। अब तक हमलोगों की सुधि लेने न तो कोई जन प्रतिनिधि आया है और नहीं कोई प्रशासनिक अधिकारी ही। सबसे बुरा हाल नरकटिया पंचायत के वार्ड 13 का है। सहिला रामपुर पंचायत के वार्ड 10 से लेकर 15 तक के सभी घरों में पानी घुसा हुआ है। सीअाे सतेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रभावित पंचायत के मुखिया को पाॅलिथीन उपलब्ध करा दिया गया है।

गायघाट और सरैया में फूड पैकेट की मांग काे लेकर बाढ़ पीड़ितों ने किया सड़क जाम

गायघाट/सरैया | गायघाट की 23 पंचायतों में फैले बाढ़ का पानी के कारण आवागमन के साथ जनजीवन अस्त व्यस्त हाे गया है। शुक्रवार काे सत्तघट्टा व बेरूआ सीमा के समीप ग्रामीण बांध टूटने से बेरूआ गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। प्रखंड प्रमुख श्रवण कुमार सिंह ने प्रखंड व जिला प्रशासन से बाढ़ पीड़ितों को पाॅलिथीन व फूड पैकेट देने की मांग की है। पाॅलिथीन व फूड पैकेट के लिए लक्ष्मण नगर पंचायत के लोगों ने मुजफ्फरपुर दरभंगा एनएच 57 को सियारी पुल के पास लगभग 3 घंटे तक जाम किया।

इधर, सरैया में बाढ़ प्रभावित चकिया, महमदपुर, बायाडीह के ग्रामीणों ने शुक्रवार को एनएच 722 रेवारोड को बाया नदी का पुल जाम कर यातायात ठप कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों पूर्व बाया नदी पर सरैया में पुल का निर्माण एनएचएआई द्वारा किया गया था। निर्माण के समय नदी में डायवर्सन बना था। पुल बन जाने के बाद डायवर्सन को नहीं तोड़ने से नदी में पानी का बहाव ठीक से नहीं होने से हम लोगों के घर तक फैल गया है। फसल डूब गई हंै। सीओ के के द्विवेदी ग्रामीणों की मांग पर एनएचएआई के अधिकारियों से फाेन पर बात कर डायवर्सन तोड़ने को कहा।

औराई की 16 पंचायताें में एक भी पगडंडी या ग्रामीण सड़क पर आवागमन चालू नहीं हो सका

बागमती, लखनदेई व मनुषमारा समेत सभी नदियों के जलस्तर में शुक्रवार को मध्यम गति से कमी जारी रही। जलस्तर घटने से बागमती तटबंध से विस्थापित एक दर्जन गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन इससे कोई भी फायदा बाढ़ पीड़ितों को नहीं हो सका है। लखनदेई व मनुषमारा नदी के पानी से तमाम सड़कें अवरुद्ध है। प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। लखनदेई नदी के टूटे तटबंध के रास्ते बह रहा पानी पूरब दिशा की ओर कटरा, गायघाट व दरभंगा जिले की ओर बह रहा है। सभी चौर जलमग्न रहने की वजह से जल निकासी नहीं हो पा रही है। औराई की 16 पंचायताें में एक भी पगडंडी या ग्रामीण सड़क पर आवागमन चालू नहीं हो सका है। राष्ट्रीय जनजन पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता दीनबंधु क्रान्तिकारी ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में भ्रमण कर लौटकर बीडीओ से कीटनाशक दवा के छिड़काव की मांग की है।
भिखनपुर पंचायत के बाढ़ पीड़ित एक सौ परिवारों के बीच बांटा तिरपाल

विजयी छपरा रिंग बांध टूटने के बाद भिखनपुर पंचायत के रसूलपुर वाजिद गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। इसे देखते हुए समाजसेवी अमितेश कौशिक उर्फ अनिल सहनी ने एक सौ बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच तिरपाल का वितरण किया।

0

amazon ke sabse best product

Leave comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *.