अजमेर17 घंटे पहले

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पानी की बोतलें पैक करते लड़के।

  • बाेतलबंद पानी बनाने वाली कंपनियाें काे हर महीने करानी पड़ती है कई जांच
  • पानी में कैंसरकारक पदार्थ ताे नहीं इसकी दाे साल में एक बार करानी हाेती है जांच

बाजाराें में बिकने वाले मिनरल वाटर का अवैध काराेबार करने वालाें ने गली-कूचाें और खेत खलिहानाें में अपने काराेबार संचालित कर रखे हैं। खाद्य और चिकित्सा विभाग ने गुरुवार काे भांवता में जिस तरह तीन ठिकानाें पर कार्रवाई कर उन्हें सीज किया उससे साफ है कि कुकरमुत्ताें की तरह हर गांव और कस्बे में नकली मिनरल वाॅटर बनाने वाले सक्रिय हैं।

गैर कानूनी तरीके से मिनरल वाॅटर बनाने वाले माफिया लाेगाें की सेहत से खिलवाड़ करने के साथ ही कानूनी तरीके से पैकेज्ड ड्रिंकिग वाॅटर बेचने वालाें के लिए बड़ी मुसीबत बन रहे हैं। लाखाें-कराेड़ाें खर्च कर ब्रांडेड पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाॅटर बनाने वाली कंपनियाें काे इन नकली माल बनाने वालाें से जूझना पड़ रहा है। उन्हें इसका काेई समाधान नहीं सूझ रहा है। खास बात यह है कि गली-कूचाें और खेताें में चंद रुपयाें में बाेतलाें में पानी भरकर बेचने वालाें का पूरा नेटवर्क बन गया है जाे रेस्टाेरेंट, हाेटलाें, किराना स्टाेर सहित शराब की दुकानाें तक सस्ते में पानी सप्लाई कर रहे हैं। कराेड़ाें खर्च कर सरकार से मिनरल वाटर की मैन्यूफैक्चरिंग के लिए सेट अप लगाने और माेटी रकम खर्च कर लाइसेंस लेने वाली कंपनियाें के लिए ये मिनरल वाॅटर माफिया सिरदर्द बन गए है।

असली कंपनियाें काे कई तरह की सरकारी प्रकियाओं से गुजरते हुए प्लांट लगाना हाेता है कई विभागाें से लाइसेंस लेने हाेते हैं, इसके बाद काम शुरू कर पाते हैं। जाे बाेतलबंद पानी यह कंपनियां बनाती है उसकी कई स्तर पर जांच हाेती है।
खाद्य व चिकित्सा विभाग की ओर से गुरुवार काे की गई कार्रवाई और भास्कर के लाइव कवरेज व स्टिंग के बाद पैक्ड ड्रिंकिंग वाॅटर का गाेरखधंधा करने वालाें में हड़कंप मचा हुआ है। सीएमएचओ विभाग ने गुरुवार काे भांवता में अलग-अलग जगहाें से दबिश के दाैरान सैंपलिंग की थी, सभी नमूने जांच के लिए जयपुर स्थित लैब में भेजे गए हैं। रिपाेर्ट आने के बाद स्पष्ट हाेगा कि उक्त पानी सेहत के लिए कितना घातक था। इसके आधार पर आराेपियाें के खिलाफ आगामी कानूनी कार्रवाई भी तय हाेगी।

कानूनी तरीके से पैक्ड ड्रिंकिंग वाॅटर की मेन्यूफैक्चरिंग
1. इन विभागाें का लाइसेंस है जरूरी :

पैकेड ड्रिंकिंग वाॅटर की मेन्यूफैक्चरिंग यूनिट के लिए अंडरग्राउंड वाॅटर ऑथाेरिटी, भारतीय मानक ब्यूराे, एयर वाॅटर पाॅल्यूशन बाेर्ड और ठाेस व प्लास्टिक पैकेज निस्तारण का लाइसेंस जरूरी है। उद्याेग विभाग का रजिस्ट्रेशन, एफएसएसएआई का लाइसेंस, जीएसटी व सीजीएसटी का रजिस्ट्रेशन और नगर निगम का अनुज्ञा पत्र अनिवार्य है। यूनिट डालने में 80 लाख से 2 कराेड़ रुपए तक लागत आती है।

2. साल में चार बड़ी जांच
पैक्ड ड्रिंकिंग वाॅटर के इन हाउस टेस्ट और संबंधित विभागाें से वर्ष में चार बड़ी जांच जरूरी है। इसमें मुख्य रूप से पीएच की जांच, कंट्राेल यूनिट टेस्टिंग, वीकली एवं मंथली टेस्टिंग सहित अन्य जांच इसमें शामिल हैं। पानी का रंग, टेस्ट, टीडीएस, क्लाेराइड, सल्फेट, एल्केनिटी, बैक्टिरिया सहित अन्य जांचे रूटीन प्रक्रिया है। पानी में नाइट्रेट, जिंक, एल्यूमिनियम, सल्फाइड, मैग्नेशियम, एंटीमाॅनी, बाेरेट, मिनरल ऑयल, काॅपर, आयरन, मैग्नीज और बेरियन की मात्रा कितनी है, इसकी भी जांच की जाती है।

यह जरूर जानें काैनसा पानी पीने लायक है और काैनसा नहीं

1. मिनरल वाॅटर : यह सल्फर, मैग्नीशियम और कैल्शियम आदि मिनरल युक्त हाेता है। मिनरल युक्त पानी सेहत के लिए फायदेमंद हाेता है। लेकिन यह महंगा हाेता है।

2. स्प्रिंग वाॅटर : यह बाेतल बंद पानी है, जिसे ग्लेशियर वाॅटर हाेने का क्लेम किया जाता है। प्राकृतिक स्प्रिंग वाॅटर सीधे ग्राउंड से गुजरकर आता है, इसलिए इसमें अशुद्धियां हाेती हैं। इसे ट्रीट करके शुद्ध किया जाता है। यह सेहत के लिए फायदेमंद हाेता है।

3. स्पार्कलिंग वाॅटर : यह साेडा पानी या कार्बाेनेटेड वाॅटर के नाम से जाना जाता है। रेस्तरां में कई बार आपने यह सुना हाेगा कि रेगुलर वाॅटर, मिनरल या स्पार्कलिंग वाॅटर लेंगे। यह कार्बाेनेशन की प्रक्रिया से गुजरता है इसलिए साेडा वाॅटर की तरह दिखता है। यह मंहगा हाेता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए सेहतमंद नहीं हाेता।

4. प्याेरिफाई वाॅटर : पानी के स्त्राेत से आने के बाद प्लांट में शुद्धिकरण की प्रक्रिया से गुजरता है। इससे पानी में माैजूद बैक्टीरिया सहित अन्य अशुद्धियां खत्म हाे जाती हैं। घर में वाॅटर प्यूरिफायर लगाकर ये पानी पी सकते हैं।

5. वेल वाॅटर : यह सबसे गंदे पानी की श्रेणी में आता है। ये न ताे साफ हाेता है और न ही सेहतमंद। बारिश के दाैरान मिट्टी से हाेते हुए भूमिगत हाे जाता है। ग्रामीण क्षेत्राें में कुएं खाेदकर यह पानी पीने के लिए काम में लेते हैं, लेकिन इसमें तमाम अशुद्धियां भरी हाेती हैं और बगैर प्यूरिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजारे बिना इसे नहीं पीना चाहिए।

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