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  • Chanakya Amar Singh Of Politics Got The Title Of ‘troublemaker’ And Sometimes ‘break The House’; Met Mulayam For The First Time In Flight

लखनऊ10 घंटे पहले

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अमर सिंह का आज निधन हो गया। लेकिन अंतिम समय में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के मतभेद और विभाजन के लिए अमर सिंह को ही जिम्मेदार ठहराया गया था।

  • राष्ट्रीय राजनीति में मुलायम सिंह के साथ अमर सिंह का बोलबाला था, उन्हें जोड़-तोड़ और पावर ब्रोकर माना गया
  • ऐसा कहा जाता था कि वे बॉलीवुड, कारोबारी जगत और सियासत तीनों में गजब का सामंजस्य बनाकर रखते थे

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के सांसद रहे अमर सिंह का आज सिंगापुर में निधन हो गया। अमर के बारे में कहा जाता है कि वह कभी पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के लिए चाणक्य बनकर उभरे, जिसकी वजह से उन्हें संकटमोचक की उपाधि भी मिली। बाद में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच जब अलगाव हुआ था, उस समय उनका नाम तेजी से उछला था। ऐसा कहा जाता था कि अखिलेश और शिवपाल के बीच दूरियां कराने के जिम्मेदार अमर सिंह ही थे। ऐसे कई मौकों पर अमर सिंह को घर तोड़ की उपाधि दी गई थी।

साल 1996 में फ्लाइट के दौरान अमर सिंह की तत्कालीन रक्षामंत्री मुलायम सिंह से मुलाकात हुई जिसके बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश लिया था। हालांकि, इससे पहले भी वह मुलायम सिंह से मिल चुके थे लेकिन इसके बाद ही मुलायम सिंह ने उन्हें पार्टी का महासचिव बनाने का फैसला किया। समाजवादी पार्टी से राज्यसभा के सांसद चुने गए अमर सिंह को कथित रूप से पारिवारिक विवाद के बाद पार्टी से निकाल दिया गया। कहा जाता है कि उनको पार्टी से निकाले जाने में आजम खान और अखिलेश यादव की बड़ी भूमिका रही। हालांकि साल 2010 में मुलायम सिंह भी इनको पार्टी से निकाल चुके हैं जिसके बाद इन्होंने राजनैतिक जीवन से कुछ समय के लिए संन्यास भी ले लिया था। लेकिन साल 2016 में इनकी फिर से समाजवादी पार्टी में वापसी हुई।

फिल्म, राजनीति और बिजनेस के काकटेल

अमर के बारे में यह कहा जाता है कि वह राजनीति, फिल्म और बिजनेस का कॉकटेल हैं। समाजवादी पार्टी में रहते उन्होंने इसे सिद्ध भी किया था। कई बार ऐसे मौके आए जब पार्टी को उन्होंने अपने राजनैतिक समझदारी से परेशानी से उबारा। जया बच्चन को राजनीति में लाने का काम अमर सिंह ने ही किया था लेकिन पार्टी से निष्कासन के समय बच्चन परिवार से इनकी दूरियां बढ़ गईं जो आज भी बनी हुई हैं। कहा यह भी जाता है कि अमिताभ बच्चन के बुरे वक्त में अमर सिहं ने उनका साथ खूब निभाया था।

मुलायम परिवार को तोड़ने का लगा आरोप

साल 2016 में ही अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच पार्टी को लेकर चल रही खींचतान के बीच एक रामगोपाल ने जिस कथित ‘बाहरी व्यक्ति’ को बार-बार जिम्मेदार बताया वह कोई और नहीं बल्कि अमर सिंह ही थे। हालांकि इस विवाद से मुलायम ने खुद को दूर रखा और अमर सिंह को फिर से पार्टी से निकाल दिया गया। उस समय अमर सिंह पर यह भी आरोप लगे थे कि उन्होंने मुलायम और अखिलेश को शाहजहां और औरंगजेब के रूप में प्रचारित कराया। छह साल बाद समाजवादी पार्टी में फिर लौटे अमर सिंह ने वर्ष 2016 में समाजवादी पार्टी में लौट आए। राज्य सभा के लिए चुने गये थे लेकिन जल्दी ही फिर उनके लिए मुश्किल भरे दिन आने वाले थे। एक साल बाद बाद ही समाजवादी पार्टी में जबरदस्त उठापटक के बाद अखिलेश पार्टी के सुप्रीमो बन गए। अमर सिंह फिर किनारे हो गए थे।

मुलायम के ख़ास अखिलेश यादव के आने के बाद हुए दूर

एक जमाना था जबकि समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह उन पर बहुत भरोसा करते थे लेकिन पार्टी की बागडोर अखिलेश के हाथों में आने के साथ ही अमर को दूध में मक्खी की तरह बाहर का रास्ता देखना पड़ा. हालांकि एक जमाने था जब मुलायम उन पर बहुत भरोसा करते थे. उन्हें पार्टी के लिए उपयुक्त माना जाता था. नेटवर्किंग से लेकर तमाम अहम जिम्मेदारियों का दारोमदार उनके कंधों पर था।

अंबानी परिवार में विभाजन का लगा आरोप

साल 2002 में धीरूभाई अंबानी का निधन हो गया। हालांकि उस समय धीरुभाई अंबानी ने 80 हजार करोड़ का टर्नओवर करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के बटवारे को लेकर कोई वसीयत नहीं लिखी थी जिसके बाद मुकेश और अनिल अंबानी के बीच संपत्ति को लेकर विवाद हो गया। अनिल अंबानी ने इस मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मदद की अपील की थी।

अनिल अंबानी अपने मित्र अमर सिंह के कारण तत्कालीन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के करीबी भी रहे। हालांकि इस वजह से मुकेश अंबानी अपने छोटे भाई से नाराज भी हुए थे जिससे उनके बीच की दूरी और बढ़ गई थी। बाद में समाजवादी पार्टी ने अनिल अंबानी को राज्यसभा की सीट भी ऑफर की थी लेकिन उन्होंने इसके लिए मना कर दिया था।।

बच्चन परिवार से मांगी थी माफी

अमर सिंह ने सिंगापुर के अस्पताल से अमिताभ बच्चन और उनके परिवार से एक वीडियो जारी कर माफी मांगी थी। वीडियो जारी करते हुए सिंह ने कहा था कि इतनी तल्खी के बावजूद यदि अमिताभ बच्चन उन्हें जन्मदिवस पर, उनके पिता की पुण्यतिथि पर मैसेज करते हैं तो मुझे अपने बयान पर खेद प्रकट कर देना चाहिए। सपा से रिश्ता बिगड़ने के बाद अमर सिंह ने अमिताभ बच्चन को लेकर कई जुबानी हमले किए थे।

नोट फाॅर वोट के दौरान भी उछला नाम

अमर सिंह का नाम यूपीए 1 के समय अमेरिका के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौते को लेकर भाजपा द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में सांसदों को कथित रूप से घूस देने के मामले में भी आया। जब फग्गन सिंह कुलस्ते, महावीर भगौरा और एक और सांसद ने संसद में नोटों के बंडल लहराए थे। हालांकि बाद में वह इन आरोपों से बरी हो गए।

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